2 दिसंबर 2020

फिल्मों की शूटिंग का ठिकाना बनेगा यूपी, हर भाषा की फिल्म को 50 लाख छूट

 उत्तर प्रदेश देश में फिल्मों की शूटिंग का नया ठिकाना बन सकता है. राज्य सरकार ने अंग्रेजी सहित किसी भारतीय भाषा में फिल्म की शूटिंग राज्य में करने पर 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का एलान किया है.





इसके जरिए सरकार आगरा में ताज महल, वाराणसी के गंगा के घाटों सहित अपने पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देना चाहती है. साथ ही इससे राज्य में रोजगार के मौके पैदा करने में भी मदद मिलेगी.

राज्य की योगी आदित्याथ की सरकार ने हाल ही में फिल्म की शूटिंग से जुड़े नियम-कायदों में बदलाव किया है. इसके तहत नकद प्रोत्सान राशि के लिए दायरा बढ़ाया गया है. अभी तक यह राशि सिर्फ हिंदी या यूपी की क्षेत्रीय भाषाओं (अवधी और भोजपुरी) में बनने वाली फिल्मों के लिए ही उपलब्ध थी. आई 



नियमों में बदलाव के बाद यह प्रोत्साहन राशि अंग्रेजी व अन्य भारतीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए भी दी जाएगी. योगी सरकार का कहना है कि सरकार के इस फैसले के बाद विदेशी और अंग्रेजी फिल्म निर्माता प्रदेश में आकर फिल्में बनाना चाहेंगे.

उत्तर प्रदेश में 'फिल्म बंधु' के चेयरमैन अवनीश के अवस्थी ने कहा, "भारतीय संविधान में दर्ज सभी भाषाएं अब हमारी फिल्म नीति का हिस्सा हैं. यदि यूपी में कोई तमिल या अंग्रेजी फिल्म बनती है, तो उसे लाभ क्यों नहीं मिलना चाहिए." फिल्म बंधु यूपी सरकार का सिंगल-विंडो सब्सिडी डिविजन है.

उन्होंने ईटी से कहा, "दूसरी भाषा की फिल्म भी यूपी की संस्कृति को दर्शाती है और इससे आपसी संबंध मधुर होते हैं. यह पहली बार है जब सरकार ने भारतीय मूल के विदेशी फिल्मकारों को भी प्रोत्साहन दिया है."

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अवस्थी ने कहा कि यह कोशिश सरकार की 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' पहल का हिस्सा है. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार की फिल्म नीति के तहत अगर किसी फिल्म की कुल शूटिंग का आधा हिस्सा यूपी में होती थी, तो उसे 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती थी.


यूपी की क्षेत्रीय भाषाओं में बनने वाली फिल्मों के लिए यह राशि 1 करोड़ रुपये तक रखी गई थी. विदेशी फिल्मों को इस नीति के लाभ के लिए योग्य नहीं माना जाता था. इस नीति के तहत मसान और जॉली एलएलबी 2 जैसी हिट फिल्मों ने फायदा उठाया था.

अब नीति में बदलाव कर अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं को शामिल कर दिया गया है. इसमें घरेलू और भारतीय मूल के विदेशी फिल्मकार को लाभ मिलेगा. भारतीय मूल के विदेशी फिल्मकार को फायदा सिर्फ तभी मिलेगा, जब उसकी फिल्म भारतीय मुद्दों पर आधारित होगी.

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