26 फ़रवरी 2021

कभी नक्सली गिरोह का सदस्य हुआ करते थे Mithun Chakraborty, एक हादसे ने बदल डाली पूरी जिंदगी ।

 

Mithun Chakraborty, once used to be a member of the Naxalite gang,an accident changed his entire life

 80 और 90 के दशक में रुपहले पर्दे का सबसे पॉपुलर सितारा बनकर चमके थे अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती। मिथुन का नाम उन अभिनेताओं में शामिल होता है जो अपने काम के प्रति जबरदस्त दीवानगी रखते हैं। 70 साल के मिथुन की तबियत अब ज्यादा ठीक नहीं रहती है, फिर भी वो फिल्मों में एक्टिव हैं। 

हाल ही में उन्होने फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की शूटिंग निपटाई है, जिसके दौरान उनकी तबियत भी बिगड़ गई थी। 

Mithun Chakraborty, once used to be a member of the Naxalite gang,an accident changed his entire life

बीते दिनों, मिथुन के राजनीति की दुनिया में दोबारा कदम रखने की चर्चा भी तेज़ हो गई थी। बाद में मिथुन चक्रवर्ती ने ये बयान देकर इन अटकलों पर वीराम लगा दिया था कि संघप्रमुख मोहन भागवत से उनकी मुलाकात पूरी तरह से पारिवारिक मुलाकात थी। 

मिथुन को ज़मीन से जुड़ा हुआ अभिनेता कहा जाता है। अपने फैंस के बीच वो बेहद फेमस हैं। दमदार अभिनय, अलग तरह की डायलॉग डिलीवरी का अंदाज़ और जबरदस्त डांसिंग स्कील्स की दम पर उन्होने दर्शकों के दिलों में खास मुकाम हासिल किया है। इंडस्ट्री में वो डिस्को डांसर के नाम से फेमस हैं। गोविंदा ने भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलकर सुपरस्टारडम हासिल की थी।

लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि एक वक्त ऐसा भी था जब मिथुन चक्रवर्ती नक्सलवाद से प्रभावित थे और नक्सली गैंग का मेंबर हुआ करते थे। लेकिन फिर एक हादसे ने उनकी जिंदगी का रुख यूं मोड़ दिया था कि उनका नक्सलवाद से पूरी तरह से मोह भंग हो गया था। 

16 जून 1950 को कोलकाता में जन्मे मिथुन का असल नाम गौरांग चक्रवर्ती है। स्कोटिश चर्च कॉलेज से कैमेस्ट्री में ग्रेजुएशन करने वाले मिथुन की जिंदगी में ऐसा वक्त आया था जब वो नक्सली गिरोह से जा जुड़े थे। दरअसल फिल्मों की दुनिया में कदम रखने से पहले मिथुन की दोस्ती दोस्ती नक्सली नेता रवि रंजन से हो गई थी, जो उस वक्त अपने भाषणों के चलते चर्चित थे।

 मिथुन अपने भाई के साथ उनके गिरोह में शामिल हो गए थे। कट्टर नक्सली बन गए थे। लेकिन नक्सल आंदोलन के दौरान ही एक हादसे में उनके भाई की करंट लगने से मौत हो गई थी। अपने इकलौते भाई को खोने के बाद मिथुन पूरी तरह से टूट गए थे। और उन्हें अपने परिवार की चिंता सताने लगी थी। इसी एक हादसे ने मिथुन को दोबारा अपने परिवार के पास आने के लिए मजबूर कर दिया था।

लेकिन मिथुन के सामने सबसे बड़ा सकंट था अपने परिवार की रोज़ी-रोटी का। मिथुन ने फिल्मों की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया और पुणे स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट में एडमिशन ले लिया। एफटीटीआई से पास आउट होने के बाद भी मिथुन की राह आसान नहीं थी। कहते हैं कि स्ट्रग्ल के दिनों में उन्हें कई रातें फुटपाथ पर गुजारनी पड़ीं थी। 

डांस का उन्हें बेहद शौक था। इसलिए उन्होने अपनी शुरुआत स्टेज शोज से की थी। बाद में उन्हें पहली फिल्म मिली थी 'मृगया'। ये फिल्म ना सिर्फ जबरदस्त हिट रही थी बल्कि इसके लिए मिथुन को पहला नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। मिथखुन को लगा था कि अब उनके दिन पलट गए हैं। लेकिन उनकी उम्मीदों के विपरीत एक बार फिर किस्मत ने उन्हें धोखा दिया। अव्वल तो उन्हें खास काम मिला नहीं, मिला भी तो उनकी फिल्में ज्यादा चली नहीं। मजबूरन मिथुन को हेलन का असिस्टेंट तक बनना पड़ा था। 

मिथुन के हाथ बड़ी सफलता लगी थी साल 1982 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘डिस्को डांसर’ से। जिसके बाद उन्होने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।


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