NCB Drug Case : क्या झूठा फंसाया गया था आर्यन को, नये गवाह ने SIT के सामने किया खुलासा, कही ये बड़ी बात - Bollywood Like

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November 7, 2021

NCB Drug Case : क्या झूठा फंसाया गया था आर्यन को, नये गवाह ने SIT के सामने किया खुलासा, कही ये बड़ी बात

 महाराष्ट्र के धुले में रहने वाले विजय पगारे नाम के शख्स ने मुंबई पुलिस की एसआईटी के सामने अपना बयान दर्ज कराया है. उसने ये भी बताया है कि मनीष भानुशाली, सैम डिसूजा और केपी गोसावी क्रूज पर छापेमारी से पहले कई मौकों पर सुनील पाटिल से मिले थे. सुनील पाटिल का नाम शनिवार को बीजेपी नेता मोहित भारतीय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लिया था और उसे एनसीपी का करीबी बताया था.



पगारे ने बताया कि वो कुछ महीनों से सुनील पाटिल के साथ रह रहे थे, क्योंकि उन्हें उनसे पैसे लेने थे. पगार ने आजतक को बताया, 'वो (सुनील पाटिल) मेरा काम नहीं कर रहा था और मेरे पैसे नहीं लौटा रहा था. इसलिए वो जहां भी जाता था, मैं उसका पीछा करता था. मैं उसके साथ अहमदाबाद, सूरत, मुंबई के द ललित होटल और नवी मुंबई के फॉर्च्यून होटल में भी था.'

भानुशाली ने कहा- बड़ा काम हो गया

पगारे ने बताया कि इस साल 27 सितंबर के नवी मुंबई के फॉर्च्यून होटल में पाटिल ठहरा था. एक कमरा पगारे और एक कमरा केपी गोसावी के नाम से बुक था. पगारे ने बताया कि बीजेपी से जुड़ा मनीष भानुशाली, जो ड्रग्स केस में गवाह है, वो फॉर्च्यून होटल आया. एक कमरे में पगारे, भानुशाली, पाटिल और केपी गोसावी मौजूद थे. तभी भानुशाली ने पाटिल से कहा कि बड़ा काम हो गया और हें अब हमें अहमदाबाद के लिए निकलना है लेकिन पगारे को साथ नहीं ले जा सकते. पगारे का दावा है कि उसे नहीं पता था कि क्या हो रहा है और उसे सिर्फ अपने पैसों से मतलब था.

3 अक्टूबर को भानुशाली दोबारा होटल के उस कमरे में आया जहां पगारे ठहरे हुए थे. उसने पगारे से कहा कि आओ तुम्हारे पैसे मिल जाएंगे. दोनों एनसीबी ऑफिस की ओर चल दिए. पगारे के मुताबिक, वाशी से एनसीबी ऑफिस आते वक्त भानुशाली फोन पर किसी से बात कर रहा था और पूजा, सैम, मयूर जैसे नाम ले रहा था. पगारे के मुताबिक, उस समय गोसावी का फोन स्विच ऑफ था और आशंका थी कि वो पैसे लेकर भाग गया है.

आर्यन केस से जुड़ी थी पैसों की बात!

पगारे ने बताया कि एनसीबी दफ्तर पहुंचने के बाद उसने बाहर मीडिया को देखा, जहां उसे बताया गया कि एनसीबी ने आर्यन खान को हिरासत में लिया है. पगारे चौंक गया क्योंकि वो जिस पैसे की बात कर रहे थे, वो इसी केस से जुड़े थे. उसके बाद सुनील पाटिल ने भानुशाली को फोन किया और पगारे को एनसीबी ऑफिस में ही छोड़कर होटल वापस आने को कहा. बाद में पगारे ने भानुशाली को ठाणे छोड़ा और वहां से वो अपने दोस्त के ऑफिस चले गए. पगारे के मुताबिक, वहां उन्होंने मीडिया क्लिप में क्रूज पर छापेमारी की खबरें देखीं, जिसमें भानुशाली और केपी गोसावी आरोपियों को बाहर लाते दिखाई दे रहे थे. उसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि ये सोची-समझी रेड थी. पगारे के मुताबिक, उन्होंने एडवोकेट सतीश मानेशिंदे को ये सारी बातें बताने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया.

पगारे ने 4 नवंबर को एसआईटी के सामने अपना बयान दर्ज कराया. उसने बताया कि ललित होटल में सुनील पाटिल और सैम डिसूजा मिलने आते थे. सुनील पाटिल के नाम से एक सुईट भी बुक था. क्रूज पर छापेमारी से पहले पाटिल ने पगारे से कहा था कि उसे काम मिल गया है और वो उसके पैसे लौटा सकता है. पगारे के मुताबिक, उसे उस वक्त क्रूज पर रेड के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन बाद में उसे एहसास हुआ कि इस छापेमारी से पैसे आ रहे थे.

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